Saturday, September 21, 2019

संध्या-वंदन




                   

🙏🙏🙏संध्या-वंदन🙏🙏🙏





संध्या की बेला आई,

हवा ने अपनी,तान सुनाई|

सूरज ने किरणो को टोका-

हुई शाम अब घर को होजा||

आसमान मे लाली छाई-

फूलो ने भी, ली अंगड़ाई|

पंछियों ने, उड़ान लगाई

घर को लौटे, बंधु- भाई||

मन्दिरो ने,घडियाल बजाई

आज़ान भी, लगी सुनाई|

हुए दिवाकर,ग़ायब नभ से

चंदा मामा आ गये, अब से||

जले दीप, हो गया उजाला,

दूर हुआ, अँधियारा- काला








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⤭जितेंद्र राठौर⤪



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16 comments:

  1. बहुत सुंदर बहुत-बहुत बधाई

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  2. मन को छू लिया👏🏻👏🏻👏🏻

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  3. मन को छू लिया👏🏻👏🏻👏🏻

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  4. आपकी कविताए सुनके मन पुलकित हो गया

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  5. बेहतरीन मेरे दोस्त

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