Sunday, September 29, 2019

Atma_bodha, आत्मबोध



                                  "आत्मबोध"




यूं तो सब कुछ पास है  तेरे, क्या कमी तुझे फिर खलती है ?
गिरती पड़ती फिर संभलती जिंदगी यूं ही तो चलती है| 
मत हो निराश होगा प्रकाश, चीर बादलों को” उम्मीद की किरणें निकलती है 
यूं तो सब कुछ पास है तेरे, क्या कमी तुझे फिर खलती है||



हार ना मान उठ देख जरा, क्या रही कमी- क्या रही गलती है? 
चिलचिलाती धूप भी सांझ आने पर ढलती है|
भर जोश जीवन में” जगा आग मन में, यह आग विरलो में जलती है 
यूं तो सब कुछ पास है तेरे, क्या कमी तुझे फिर खलती है||


मत बैठ हारकर, जय पराजय स्वीकार कर 
झोंक दे खुद को” जीवन तप में, देख कैसे किस्मत की देवी पिघलती है| 
जमा तो पैर जरा जमकर; देख धरती भी सोना उगलती है 
यूं तो सब कुछ पास है तेरे, क्या कमी तुझे फिर खलती है||




हौसला रख संभाल खुद को’ करे जो मेहनत, मनचाही खुशी उसे ही मिलती है
समय की फेरी यूं ही चलती है” ठान ले जो ‘मन में भाग्य रेखा भी बदलती है|
कभी धूप-कभी छांव जिंदगी यूं ही तो चलती है
यूं तो सब कुछ पास है तेरे, क्या कमी तुझे फिर खलती है||


Atma_bodha, आत्मबोध


जितेंद्र राठौर


Self_Knowledge
Sangharsh Ke Moti




















Other Post-


आवाहन-देशभक्ति कविताएँ


हिंदी कविताएँ\ संघर्ष के मोती


बचपन पर हिंदी कविता, बाल कविता, Hindi Poem on Childhood, Bachpan ki kavita | kids’ poem | Hindi poems for kids






18 comments:

  1. Failure will never overtake you. if your determination to succeed is strong enough.

    For you my brother, I hope you always success in your life.

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपकी टिप्पणियों और प्रशंसा के शब्दों के लिए धन्यवाद

      Delete
  2. This is the great example of combination of beautiful thoughts coming from pure soul....

    ReplyDelete
    Replies
    1. मैं आपके द्वारा की गई प्रशंसा का अपने अंतर्मन से धन्यवाद करता हूं ,और इसी तरह अपने विचारों को प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा|आप सभी का सहयोग इसी तरह अपेक्षित है! धन्यवाद...

      Delete
  3. We would definitely like to see more from you sir...

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपके द्वारा की गई टिप्पणियों के लिए सादर धन्यवाद, मेरा प्रयास रहेगा अपने कविताओं के माध्यम से आपसे जुड़े रहने का| धन्यवाद....

      Delete

दीपदान ( "आओ फिर दीपक जलाएं" )

                   🪔  दीपदान🪔                        "आओ फिर दीपक जलाएं" आओ फिर ; दीपक जलाएं , घने ...